कोरबा. औद्योगिक नगरी के रूप में देशभर में पहचान बना रहे कोरबा जिले की प्रगति में श्रमिक वर्ग की भूमिका सबसे अहम रही है। बावजूद इसके, आज भी बड़ी संख्या में मजदूर अपने संवैधानिक अधिकारों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। इसी उद्देश्य से जिले के होनहार अधिवक्ता श्री रघुनंदन सिंह ठाकुर ने श्रम अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, जिसे जनहित में न्यूज पोर्टल के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
अधिवक्ता ठाकुर ने बताया कि भारत का संविधान श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। संविधान के भाग-4 में शामिल राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के तहत श्रमिकों के लिए समान वेतन, उचित कार्य परिस्थितियां और जीवन निर्वाह योग्य मजदूरी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। अनुच्छेद 39 के अनुसार समान कार्य के लिए पुरुष और महिला दोनों को समान वेतन दिया जाना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 14 सभी श्रमिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, जिससे किसी भी प्रकार का भेदभाव अवैध हो जाता है। वहीं अनुच्छेद 19(1)(सी) के तहत मजदूरों को यूनियन या संगठन बनाने का अधिकार प्राप्त है, जिससे वे अपने अधिकारों के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठा सकते हैं।
संविधान का अनुच्छेद 23 जबरन श्रम और मानव तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, जबकि अनुच्छेद 24 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक कार्यों में लगाने पर रोक है। इसके अलावा अनुच्छेद 43 और 43ए श्रमिकों के लिए मानवीय कार्य परिस्थितियों, मातृत्व लाभ और उद्योगों के प्रबंधन में भागीदारी की बात करता है।
अधिवक्ता ठाकुर ने कहा कि श्रमिक यदि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों, तो शोषण के खिलाफ मजबूती से खड़े हो सकते हैं। जागरूक मजदूर ही मजबूत उद्योग और सशक्त समाज की नींव रखते हैं।


